पाचन तंत्र (Digestive System)

पाचन तंत्र (Digestive System)


1. प्रस्तावना (Introduction)

  • मनुष्य एक जटिल जीव है और उसकी कोशिकाएँ (Cells) लगातार ऊर्जा की माँग करती हैं।
  • यह ऊर्जा भोजन (Food) से प्राप्त होती है।
  • भोजन में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज सीधे उपयोग योग्य नहीं होते।
  • इन्हें छोटे-छोटे अणुओं (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, फैटी अम्ल आदि) में तोड़ा जाता है।
  • इस जटिल प्रक्रिया को ही पाचन (Digestion) कहा जाता है।
  • पाचन का कार्य हमारे शरीर का एक विशेष अंग-तंत्र पाचन तंत्र (Digestive System) करता है।

2. पाचन तंत्र की परिभाषा (Definition)

👉 पाचन तंत्र वह अंग-तंत्र है जो भोजन को यांत्रिक (Mechanical) और रासायनिक (Chemical) प्रक्रियाओं द्वारा सरल अणुओं में तोड़ता है, उनका अवशोषण करता है और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालता है।


3. पाचन तंत्र के मुख्य अंग (Organs of Digestive System)

(A) मुख्य पाचन नली (Alimentary Canal)

लगभग 9 मीटर लंबी नली जिसमें भोजन प्रवेश से लेकर मल त्याग तक की यात्रा करता है। इसके अंग हैं –

  1. मुख (Mouth)
  2. ग्रसनी (Pharynx)
  3. अन्ननलिका (Esophagus)
  4. आमाशय (Stomach)
  5. छोटी आँत (Small Intestine)
    • ग्रहणी (Duodenum)
    • जेजुनम (Jejunum)
    • इलियम (Ileum)
  6. बड़ी आँत (Large Intestine)
    • सीकम (Cecum)
    • कोलन (Colon)
    • मलाशय (Rectum)
    • गुदा (Anus)

(B) सहायक अंग (Accessory Organs)

  • लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands)
  • यकृत (Liver)
  • पित्ताशय (Gall Bladder)
  • अग्न्याशय (Pancreas)

4. अंगों का विस्तृत अध्ययन (Detailed Study of Organs)

(1) मुख (Mouth)

  • संरचना:
    • होंठ (Lips) – भोजन को पकड़ने व चखने में सहायक।
    • दाँत (Teeth) – भोजन को काटने, चबाने और पीसने का कार्य।
    • जीभ (Tongue) – स्वाद चखने, भोजन मिलाने व निगलने में सहायक।
  • लार (Saliva):
    • प्रतिदिन लगभग 1–1.5 लीटर लार बनती है।
    • इसमें सलाईवरी एमाइलेज (Ptyalin) होता है, जो स्टार्च को माल्टोज में बदलता है।

(2) ग्रसनी (Pharynx)

  • मुख और अन्ननलिका के बीच की नली।
  • इसमें वायु व भोजन दोनों का मार्ग है।
  • निगलने (Swallowing) की प्रक्रिया में जीभ और एपिग्लॉटिस (Epiglottis) सहयोग करते हैं।

(3) अन्ननलिका (Esophagus)

  • लंबाई लगभग 25 सेमी।
  • भोजन यहाँ पेरिस्टाल्टिक गति से नीचे आमाशय तक पहुँचता है।
  • इसमें कोई पाचन क्रिया नहीं होती।

(4) आमाशय (Stomach)

  • थैलीनुमा अंग, बायीं ओर ऊपरी पेट में स्थित।
  • भाग: कार्डियक, फंडस, बॉडी और पाइलोरिक।
  • रस (Gastric Juice):
    • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) – बैक्टीरिया नष्ट करता है और पेप्सिन सक्रिय करता है।
    • पेप्सिन – प्रोटीन को पेप्टाइड्स में तोड़ता है।
    • गैस्ट्रिक लिपेज – वसा का आंशिक पाचन।
    • म्यूकस – आमाशय की आंतरिक परत को अम्ल से बचाता है।

(5) छोटी आँत (Small Intestine)

  • लंबाई लगभग 6 मीटर।
  • भाग:
    • ग्रहणी (Duodenum) – पित्त व अग्न्याशय रस मिलता है।
    • जेजुनम (Jejunum) – पाचन और अवशोषण।
    • इलियम (Ileum) – अवशोषण का मुख्य भाग।
  • विशेषता:
    • आंत की दीवार पर विली और माइक्रोविली होती हैं, जो सतह क्षेत्र बढ़ाकर अवशोषण अधिक करती हैं।

(6) बड़ी आँत (Large Intestine)

  • लंबाई लगभग 1.5 मीटर।
  • भाग: सीकम, कोलन, मलाशय।
  • कार्य:
    • जल और खनिज लवण का अवशोषण।
    • शेष पदार्थ का मल में परिवर्तन।

(7) सहायक ग्रंथियाँ

(i) लार ग्रंथियाँ:

  • तीन जोड़ी – पैरोटिड, सबलिंगुअल, सबमैक्सिलरी।
  • कार्बोहाइड्रेट पाचन का प्रारंभ।

(ii) यकृत (Liver):

  • शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि (1.2–1.5 किग्रा)।
  • पित्त रस बनाता है, जो वसा का इमल्सीफिकेशन करता है।

(iii) पित्ताशय (Gall Bladder):

  • पित्त रस को संग्रहित करता है और आवश्यकता पड़ने पर ग्रहणी में छोड़ता है।

(iv) अग्न्याशय (Pancreas):

  • द्विग्रंथीय अंग – अंतःस्रावी (Insulin, Glucagon) और बहिःस्रावी (Pancreatic Juice)।
  • Pancreatic Juice Enzymes:
    • ट्रिप्सिन → प्रोटीन पाचन।
    • एमाइलेज → कार्बोहाइड्रेट पाचन।
    • लिपेज → वसा पाचन।

5. पाचन की प्रक्रिया (Step-wise Digestion Process)

(A) मुख में

  • स्टार्च → माल्टोज (Salivary Amylase)।

(B) आमाशय में

  • प्रोटीन → पेप्टाइड्स (Pepsin)।
  • वसा का आंशिक पाचन।

(C) ग्रहणी में

  • पित्त रस → वसा का इमल्सीफिकेशन।
  • अग्न्याशय रस –
    • ट्रिप्सिन → प्रोटीन → अमीनो अम्ल।
    • एमाइलेज → स्टार्च → माल्टोज।
    • लिपेज → वसा → फैटी अम्ल + ग्लिसरॉल।

(D) जेजुनम व इलियम में

  • अंतिम पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण।

(E) बड़ी आँत में

  • जल व खनिज अवशोषण।
  • अपशिष्ट को मल में बदलना।

6. पाचन एंजाइम व उनका कार्य (Table)

एंजाइम कहाँ से स्रवित कार्य
सलाईवरी एमाइलेज लार ग्रंथि स्टार्च → माल्टोज
पेप्सिन आमाशय प्रोटीन → पेप्टाइड्स
गैस्ट्रिक लिपेज आमाशय वसा का आंशिक पाचन
ट्रिप्सिन अग्न्याशय प्रोटीन → अमीनो अम्ल
एमाइलेज अग्न्याशय स्टार्च → माल्टोज
लिपेज अग्न्याशय वसा → फैटी अम्ल + ग्लिसरॉल

7. पाचन हार्मोन (Digestive Hormones)

  1. गैस्ट्रिन – HCl और पेप्सिन का स्रवण बढ़ाता है।
  2. सीक्रेटिन – अग्न्याशय रस को उत्तेजित करता है।
  3. कोलेसिस्टोकाइनिन (CCK) – पित्ताशय से पित्त निकलवाता है।

8. पोषण अवशोषण (Absorption of Nutrients)

  • ग्लूकोज और अमीनो अम्ल → रक्त में।
  • फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल → लसीका (Lymph) में।
  • विटामिन और खनिज → छोटी व बड़ी आँत में।

9. पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियाँ (Diseases of Digestive System)

  1. अजीर्ण (Indigestion): भोजन न पचना।
  2. अम्लपित्त (Acidity): HCl की अधिकता।
  3. पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcer): आमाशय की परत में घाव।
  4. जॉन्डिस (Jaundice): यकृत में पित्त का अवरोध।
  5. कब्ज (Constipation): मल का सख्त होना।
  6. दस्त (Diarrhea): बार-बार पतला मल।
  7. हैजा (Cholera): जीवाणु जनित रोग।

10. पाचन तंत्र का महत्व (Importance)

  • भोजन से ऊर्जा प्रदान करना।
  • प्रोटीन से ऊतक निर्माण।
  • वसा से ऊर्जा व हार्मोन संश्लेषण।
  • विटामिन व खनिज से शरीर क्रियाओं का नियंत्रण।
  • अपशिष्ट को बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ रखना।

11. निष्कर्ष (Conclusion)

  • पाचन तंत्र मानव शरीर का आधारभूत तंत्र है।
  • यह भोजन को छोटे अणुओं में बदलकर ऊर्जा और पोषण देता है।
  • पाचन तंत्र स्वस्थ रहे तो पूरा शरीर स्वस्थ रहता है।

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