योग के आठ अंगों का विश्लेषण (Ashtanga Yoga Explained)
🕉️ योग के आठ अंगों का विश्लेषण (Ashtanga Yoga Explained) प्रस्तावना भारतीय संस्कृति में योग का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण है। योग केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों का समूह नहीं, बल्कि यह एक पूर्ण जीवन दर्शन है जो मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा — तीनों का संतुलन स्थापित करता है। ‘योग’ शब्द संस्कृत धातु “युज्” से बना है, जिसका अर्थ है – “जोड़ना” या “संयोजन करना” । अर्थात्, योग वह साधन है जो जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ता है। योग की अनेक पद्धतियाँ हैं — हठयोग, राजयोग, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग आदि। परंतु पतंजलि योगसूत्र में वर्णित “अष्टांग योग” (Ashtanga Yoga) को योग का सर्वश्रेष्ठ और वैज्ञानिक स्वरूप माना गया है। ऋषि पतंजलि ने कहा है – “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” अर्थात् – योग वह साधन है जिसके द्वारा चित्त की वृत्तियों का निरोध किया जाता है। मन को वश में करना, इंद्रियों पर नियंत्रण, और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर होना — यही अष्टांग योग का उद्देश्य है। अष्टांग योग क्या है? ‘अष्टांग योग’ का अर्थ है — योग के आठ अंग या चरण। पतंजलि ने योग क...